UPSSSC लोअर मेन्स के लिए देशज शब्द की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका। UPSSSC लोअर मेन्स के लिए देशज शब्द की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका।
| वर्ग | विवरण | प्रमुख उदाहरण |
|---|---|---|
| अनुकरणात्मक | ध्वनि के अनुकरण पर आधारित | खटखट, थरथर, भिनभिन |
| अज्ञात मूल | उत्पत्ति का निश्चित स्रोत अज्ञात | लोटा, पगड़ी, झोला |
| क्षेत्रीय प्रभाव | विशिष्ट अंचलों से प्रचलित | खटिया, डिबिया, लुटिया |
वे शब्द जिनकी उत्पत्ति का मूल स्रोत ज्ञात नहीं होता और जो क्षेत्रीय प्रभाव व आवश्यकतानुसार आम बोलचाल में प्रचलित हो जाते हैं, 'देशज' या 'देशीय' शब्द कहलाते हैं।वे शब्द जिनकी उत्पत्ति का मूल स्रोत ज्ञात नहीं होता और जो क्षेत्रीय प्रभाव व आवश्यकतानुसार आम बोलचाल में प्रचलित हो जाते हैं, 'देशज' या 'देशीय' शब्द कहलाते हैं।
1. इनकी उत्पत्ति संस्कृत या अन्य विदेशी भाषाओं से सिद्ध नहीं होती। 2. ये मुख्य रूप से ग्रामीण और आंचलिक बोलियों से हिंदी में आए हैं। 3. ये शब्द जनमानस की सहज अभिव्यक्ति का परिणाम हैं।1. इनकी उत्पत्ति संस्कृत या अन्य विदेशी भाषाओं से सिद्ध नहीं होती। 2. ये मुख्य रूप से ग्रामीण और आंचलिक बोलियों से हिंदी में आए हैं। 3. ये शब्द जनमानस की सहज अभिव्यक्ति का परिणाम हैं।
ध्वनि के अनुकरण पर बने शब्द देशज श्रेणी में आते हैं। उदाहरण: खटखट, पटपट, गड़गड़ाहट, भिनभिन, कलकल, टाय-टाय, चूं-चूं, म्याऊं, थरथराहट, सरसराहट।ध्वनि के अनुकरण पर बने शब्द देशज श्रेणी में आते हैं। उदाहरण: खटखट, पटपट, गड़गड़ाहट, भिनभिन, कलकल, टाय-टाय, चूं-चूं, म्याऊं, थरथराहट, सरसराहट।
दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली वस्तुएं जिनके नाम का कोई स्पष्ट इतिहास नहीं है: लोटा, डिबिया, खटिया, झोला, लुटिया, थाली, चम्मच (क्षेत्रीय), चिमटा, बाल्टी (पुर्तगाली प्रभाव के बावजूद बोलचाल में देशज), डंडा, लठ्ठ।दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली वस्तुएं जिनके नाम का कोई स्पष्ट इतिहास नहीं है: लोटा, डिबिया, खटिया, झोला, लुटिया, थाली, चम्मच (क्षेत्रीय), चिमटा, बाल्टी (पुर्तगाली प्रभाव के बावजूद बोलचाल में देशज), डंडा, लठ्ठ।
विभिन्न क्षेत्रों की बोलियों से आए शब्द: पगड़ी, पेट, थैला, टांग, खिड़की, तेंदुआ, फुनगी, कलाई, जूता, खुरपा, कुदाल, घोंसला, छप्पर, मड़ैया।विभिन्न क्षेत्रों की बोलियों से आए शब्द: पगड़ी, पेट, थैला, टांग, खिड़की, तेंदुआ, फुनगी, कलाई, जूता, खुरपा, कुदाल, घोंसला, छप्पर, मड़ैया।
झंझट, झिलमिल, धड़ाम, लपलपाना, खुरचनी, चिमटी, गड़बड़, घोटाला, भोपु, टट्टू, खाट, पेट, लोटा, ठठेरा, लुगाई, लुच्चा, लफंगा, ललकार।झंझट, झिलमिल, धड़ाम, लपलपाना, खुरचनी, चिमटी, गड़बड़, घोटाला, भोपु, टट्टू, खाट, पेट, लोटा, ठठेरा, लुगाई, लुच्चा, लफंगा, ललकार।
बबुआ, बिटिया, कड़ाही, डोंगा, परांत, ओखली, मूसल, चटाचट, फटाफट, धड़ाधड़, खटाखट, ठकठक, टप टप, सन्नाटा, फुसफुसाना, गुड़गुड़ाना।बबुआ, बिटिया, कड़ाही, डोंगा, परांत, ओखली, मूसल, चटाचट, फटाफट, धड़ाधड़, खटाखट, ठकठक, टप टप, सन्नाटा, फुसफुसाना, गुड़गुड़ाना।
विदेशी शब्द किसी अन्य भाषा (जैसे अरबी, फारसी, अंग्रेजी) से हिंदी में आए हैं, जबकि देशज शब्द भारत की ही क्षेत्रीय बोलियों (भोजपुरी, अवधी, ब्रज आदि) से हिंदी में आए हैं।विदेशी शब्द किसी अन्य भाषा (जैसे अरबी, फारसी, अंग्रेजी) से हिंदी में आए हैं, जबकि देशज शब्द भारत की ही क्षेत्रीय बोलियों (भोजपुरी, अवधी, ब्रज आदि) से हिंदी में आए हैं।
1. यदि शब्द ध्वनि का बोध कराए (जैसे: खट-खट), तो वह 99% देशज होगा। 2. ग्रामीण परिवेश की वस्तुओं के नाम अधिकांशतः देशज होते हैं। 3. यदि विकल्प में 'तत्सम' और 'विदेशी' न हों, तो वह शब्द देशज होने की प्रबल संभावना रखता है। 4. 'लोटा' और 'पगड़ी' जैसे शब्दों को 'की-वर्ड' मानकर याद रखें, ये अक्सर परीक्षा में आते हैं।1. यदि शब्द ध्वनि का बोध कराए (जैसे: खट-खट), तो वह 99% देशज होगा। 2. ग्रामीण परिवेश की वस्तुओं के नाम अधिकांशतः देशज होते हैं। 3. यदि विकल्प में 'तत्सम' और 'विदेशी' न हों, तो वह शब्द देशज होने की प्रबल संभावना रखता है। 4. 'लोटा' और 'पगड़ी' जैसे शब्दों को 'की-वर्ड' मानकर याद रखें, ये अक्सर परीक्षा में आते हैं।